भागलपुर, मार्च 1 -- -प्रस्तुति : शंकर किशोर सिंह होली नजदीक आते ही जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों के बाजार रंग-बिरंगे अबीर, गुलाल और पिचकारियों से सज गए हैं। फुटपाथ से लेकर बड़ी दुकानों तक अलग-अलग ब्रांड और बिना ब्रांड के रंगों की भरमार है। कम कीमत में उपलब्ध रंगों की ओर ग्राहकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इन सस्ते और बिना लेबल वाले रंगों के पीछे छिपा खतरा कई बार होली की खुशियों पर भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक सस्ते रंगों में हानिकारक रसायनों की मिलावट की आशंका अधिक रहती है। नकली या मिलावटी रंगों में सीसा, क्रोमियम, कांच का बारीक चूर्ण, औद्योगिक डाई और अन्य रासायनिक तत्व मिलाए जाते हैं। ये पदार्थ त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं। कई बार रंगों की चमक बढ़ाने के लिए ऐस...
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