भागलपुर, मार्च 18 -- -प्रस्तुति : असद खान मस्जिदों के इमाम और मदरसों के उलेमा जिले में आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। घर-परिवार से दूर रहकर 24 घंटे समाज की खिदमत करने के बाद भी उन्हें इतनी आमदनी नहीं हो पाती है, जिससे महंगाई के दौर में तमाम जरूरतें पूरी हो सकें। हालांकि इसे लेकर उन्हें मलाल तो नहीं है, लेकिन जिम्मेदारों से सवाल जरूर है। उलेमाओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि कई राज्यों में उलेमाओं की खिदमत को देखते हुए उनका न्यूनतम वेतन तय किया गया है। बताया कि पश्चिम बंगाल ने तो वजीफा भी तय कर दिया है। जमुई में कोई भी मस्जिद या फिर मदरसा वक्फ बोर्ड के अधीन नहीं है। इनमें नमाज अदा कराने वाले इमामों व मदरसा में पढ़ाने वाले उलेमा के लिए समाज के लोगों को सामने आना चाहिए, ताकि इमाम की खिदमत का वाजिब हक मिले। मस्जिदों के इमामों ने कहा कि अधि...