भागलपुर, जनवरी 5 -- -प्रस्तुति, राकेश सिन्हा पूस की सर्द सुबह हो या फिर मई और जून महीने का गर्म दिन। हर दिन सैकड़ों मजदूर काम की तलाश में जमुई पहुंचते हैं। उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। दैनिक मजदूर सुबह 5.30 बजे से शहर के कचहरी और महिसौड़ी चौक पर पहुंचकर काम की तलाश करते हैं। जिन्हें काम मिल जाता है उनका तो रोजी-रोटी चल जाता है, जिन्हें नहीं मिलता वे वापस घर लौटते हैं। मजदूरों का परिवार इस इंतजार में होता है कि वह काम के पैसे से घर का चूल्हा जलेगा। यह किसी एक दिन का वाकया नहीं बल्कि हर दिन का नजारा होता है। कचहरी शहर के कचहरी और महिसौड़ी चौक पर जमुई के ही नहीं बल्कि लखीसराय के भी मजदूर पहुंचते हैं। घर का नाश्ता लेकर वे 7:00 बजे तक नाश्ता कर फिट हो जाते हैं। जैसे ही किसी बाबू की बाइक या कार लगती है, मजदूर उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं। उन्...