गोंडा, जनवरी 6 -- घर-घर शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए केन्द्र व सूबे की सरकारों की ओर से कई योजनाएं संचालित है। यहां तक शहरी क्षेत्रों में अत्याधुनिक तरीके से पेयजल पहुंचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पानी की टंकियों के निर्माण से लेकर आटोमेशन के जरिए उसके संचालन पर जोर दिया जा रहा है। पाइप लाइनों में सतत सुधार व बदलाव किए जा रहे हैं। गोण्डा। शहर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे जितने ऊंचे हैं, हकीकत उतनी ही बदहाल। कांशीराम कॉलोनी से लेकर डेढ़ सौ साल पुराने मालवीय नगर, पटेल नगर तक जर्जर और पुरानी पाइपलाइनों से रोज़ाना हजारों लीटर साफ पानी सड़कों, नालियों और सीवर में बह रहा है। कहीं पाइप फूटी हैं, कहीं जोड़ खुले पड़े हैं तो कहीं पेयजल की लाइनें नालों और सीवर के बिल्कुल सटे होकर गुजर रही हैं। नतीजा यह कि लोगों तक पहुंचने...
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