वाराणसी, जनवरी 12 -- वाराणसी। जिन्हें आइकॉन या आदर्श माना, वही शराब-गुटखा का प्रचार करने लगा। जिन पर बच्चों-किशोरों और युवाओं को सही राह दिखाने की जिम्मेदारी है, वे शॉर्टकट रास्ते अख्तियार करने लगे या जिम्मेदारी त्याग बैठे हैं। इस लोचा का भी सीक्वेंस है-पैरेंटिंग, स्कूलिंग, पुलिसिंग और मॉनिटरिंग के रूप में। ऐसे में पान की गुमटियां-चाय की दुकानें, हाईवे, स्कूलों के आसपास नशे का अड्डा क्यों न बनें? सोशल मीडिया प्लेटफार्म जहर क्यों न घोलें? फिर, 'दिव्य-भव्य' काशी कैसे बन पाएगी युवाओं की मॉडल? यह सवाल स्वामी विवेकानंद के मुरीद युवाओं के बीच से उठा है। ------- भारत के सर्वकालिक आदर्श स्वामी विवेकानंद की जयंती पर देश के हर कोने में युवाओं के लिए 'आदर्श-पथ' की खोज और पड़ताल होने लगती है। 12 जनवरी का जोशीला संकल्प दिन बीतने के साथ ठंडा पड़ने लगता...
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