वाराणसी, जनवरी 13 -- वाराणसी। तुलसीपुर मोहल्ला शहर के स्मार्ट विकास के दावों और हकीकत के बीच संघर्ष कर रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना यहां की गलियों में पहुंचने में नाकाम रही है। मोहल्ले के खाली प्लॉट कूड़े संग्रहण केन्द्र बन गए हैं। मेनरोड पर छह महीने से बिजली का खंभा गिरा पड़ा है। आधी आबादी पाइप लाइन के अभाव में पेयजल के लिए तरस रही है। गलियों में स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। पास-पड़ोस में विकास की धारा बहती देख बाशिंदों को कोफ्त और कसक अधिक है। -------- महमूरगंज क्षेत्र के तुलसीपुर मोहल्ले के नाम से वार्ड भी है। मोहल्ला अनदेखी और उपेक्षा का जीवंत उदाहरण बन गया है। इसका गुस्सा 'हिन्दुस्तान' से बाशिंदों की बातचीत में उभरा। राजनाथ खरवार ने कहा कि लगभग चार हजार की आबादी वाली मोहल्ले में नगर निगम की डोर-टू-...
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