भागलपुर, फरवरी 27 -- - प्रस्तुति : ओमप्रकाश अम्बुज/मोना कश्यप कटिहार की आबोहवा में अब बदलाव की एक शांत लेकिन बेहद सशक्त आहट महसूस की जा सकती है। कभी केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपने सपनों को आकार देने के लिए मजबूती से बाहर कदम रख रही हैं। हालांकि, कामयाबी की यह डगर उनके लिए आसान नहीं है। कभी व्यापार के लिए पूंजी का अभाव, कभी अपने उत्पादों के लिए उचित बाजार न मिल पाने की चिंता तो कभी सामाजिक झिझक उनके रास्ते में एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। इन तमाम चुनौतियों और संघर्षों के बावजूद उनके कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। वे इस बात को भली-भांति समझती हैं कि जब एक महिला आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त होती है तो पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ी संबल पाती है। हौसले और संघर्ष का यही अटूट जज्बा आज कटिहार की एक नई और प्रेरक त...