भागलपुर, फरवरी 1 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार जिले के खेल मैदान आज सिर्फ मिट्टी और घास का टुकड़ा नहीं, बल्कि सैकड़ों युवाओं के अधूरे सपनों की कहानी बयां कर रहे हैं। रोज सुबह-शाम पसीना बहाने वाले खिलाड़ी बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर मैदान में उतरते हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं की दीवारें उनके हौसलों से टकराकर उन्हें रोक देती हैं। जिले के प्रमुख खेल केंद्र डीएस कॉलेज और राजेंद्र स्टेडियम। जहां प्रतिदिन 200 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं, आज खुद बदहाली की तस्वीर बने हुए हैं। खिलाड़ी बताते हैं कि अभ्यास के लिए मैदान तक पहुंचना ही काफी नहीं, असली संघर्ष वहां शुरू होता है। नेट, पिच और अन्य जरूरी खेल संसाधनों की भारी कमी है। हालात ऐसे हैं कि खिलाड़ियों को अपने साथ बैट, गेंद, स्टंप और अन्य सामान ढोकर लाना पड़ता है और अभ्यास के बाद ...