भागलपुर, फरवरी 3 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार जिले में दिव्यांग जनों के सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनेक योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन योजनाओं के उद्देश्यों से बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रही है। कागजों में मजबूत दिखने वाली व्यवस्था व्यवहार में दिव्यांगों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रही है। आवास, राशन, पहचान, रोजगार और शिक्षा हर मोर्चे पर दिव्यांग जन खुद को हाशिये पर खड़ा महसूस कर रहे हैं। दिव्यांगों का कहना है कि योजनाओं का लाभ पाने के लिए उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आवेदन, सत्यापन और तकनीकी शर्तों की जटिल प्रक्रिया उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। बैटरी चालित साइकिल, जो कई दिव्यांगों की आजीविका और आवाजाही का मुख्य साधन है, खराब होने के बाद अनुपयोगी हो चुकी...