भागलपुर, फरवरी 26 -- प्रस्तुति : ओमप्रकाश अम्बुज/मोना कश्यप खेत में खड़ी फसल जब खाद के इंतजार में पीली पड़ने लगे तो किसान की बेचैनी शब्दों में बयां नहीं होती। कटिहार के गांवों में इन दिनों यही चिंता हर चौपाल पर सुनाई दे रही है। समय पर यूरिया और डीएपी नहीं मिलने से किसानों की रातों की नींद उड़ गई है। सरकारी दर पर खाद मिलना मुश्किल है और निजी दुकानों पर महंगी कीमत चुकाना मजबूरी। कर्ज लेकर बोआई करने वाले किसान अब बढ़ती लागत और घटती उपज के दोहरे दबाव में हैं। वे कहते हैं- खाद महंगी है, गुणवत्ता संदिग्ध है, ऊपर से पटवन की दिक्कत अलग। मेहनत पूरी, लेकिन भरोसा अधूरा। बोले कटिहार मुहिम के तहत जब किसानों ने दिल खोला तो सामने आई सिर्फ एक मांग - खेती को बचाइए, तभी किसान बचेंगे। इस पर जनप्रतिनिधि और प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। कटिहार में इन ...