भागलपुर, जनवरी 21 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, देवाशीष बिहार की शिक्षा व्यवस्था को अपने कंधों पर संभालने वाले अतिथि शिक्षक आज सबसे ज्यादा असहाय और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। जिन शिक्षकों ने वर्षों तक कक्षा में खड़े होकर छात्रों को ज्ञान दिया, परीक्षा परिणाम सुधारे और विद्यालयों की शैक्षणिक गरिमा बनाए रखी, वे आज रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 2018 से 2024 तक प्लस टू विद्यालयों में पढ़ाने वाले ये अतिथि शिक्षक अब खुद अपने भविष्य की परीक्षा में फंसे हुए हैं। राज्य के प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए वर्ष 2018 में सरकार ने 4257 अतिथि शिक्षकों की बहाली की थी। यह व्यवस्था अस्थायी कही गई, लेकिन हकीकत यह रही कि यही शिक्षक विद्यालयों की शैक्षणिक रीढ़ बन गए। विज्ञान, कला और वाणिज्य। तीनों संकायों में इन शिक्ष...
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