भागलपुर, जनवरी 9 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज कटिहार समेत पूरे सीमांचल और कोसी अंचल में जारी कड़ाके की ठंड अब सिर्फ इंसानी परेशानी की कहानी नहीं रही। यह सर्दी उन बेजुबानों की भी परीक्षा ले रही है, जो न शिकायत कर सकते हैं और न ही व्यवस्था से सवाल पूछ सकते हैं। पालतू जानवर, सड़क किनारे रहने वाले पशु, खुले आसमान के नीचे दाना-पानी खोजते पक्षी और ठंडे खून वाले सरीसृप। सभी इस शीतलहर की मार झेल रहे हैं। गिरते तापमान और घने कोहरे ने जनजीवन को लगभग ठहराव की स्थिति में ला खड़ा किया है। कटिहार और आसपास के इलाकों की सच्चाई यह है कि आज भी करीब 40 प्रतिशत लोग ठंड से बचने के लिए फटे-पुराने कपड़ों, धान के पुआल और अस्थायी अलाव पर निर्भर हैं। बावजूद इसके, नगर प्रशासन से लेकर अंचल प्रशासन तक अलाव की मुकम्मल व्यवस्था जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। नतीजतन सर...
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