एटा, नवम्बर 1 -- घर-घर में देव जगाने के लिए सिंघाड़े लाया जाता है, लेकिन जान हथेली पर रखकर सिंगाड़े की खेती करने वाले किसानों के मुहुर्त का शुभ दिन कब आएगा यह नहीं पता। किसानों को उचित दाम न मिलने के बाद खासे परेशान हैं। किसानों को उनकी उपज का दाम ना मिलने के पीछे जिम्मेदारों का चुप रहना है। जनपद के जिम्मेदार सरकार को आज तक यह भी नहीं बता पाए कि एटा सिंघाड़े की खेती करने वाले जिले में अव्वल है। मंडी और संसाधन के अभाव में औने पौने दाम में किसान अपनी फसल बेच रहे हैं। सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों से जब बोले एटा के तहत बात की तो उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। निधौली कलां और कुछ जलेसर के क्षेत्र में बड़ी संख्या में सिंघाड़े की खेती होती है। करीब आठ हजार बीघा से अधिक क्षेत्र में किसान सिंघाड़े की खेती करते हैं। इस बार सिंघाड़े की खेती से किसानो...
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