एटा, अक्टूबर 3 -- दशहरे पर शस्त्र पूजन केवल पूजा-अर्चना का ही नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव को याद करने का मौका है। यह देश का एक महान पर्व है जो असत्य पर सत्य की, अधर्म पर धर्म की और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। इस दौरान शस्त्र पूजन की परंपरा भी इसी ऐतिहासिक और धार्मिक आधार पर जुड़ी हुई है। इस कार्यक्रम से जुड़े लोगों से बोले एटा के तहत बात की गई। संवाद के दौैरान उन्होंने इस पूजन को शौर्य की बात कहते हुए पंरपरा को बनाए रखने की बात कही। प्राचीन काल से ही शस्त्र समाज के लिए केवल हथियार नहीं, बल्कि धर्म और राष्ट्र रक्षा के साधन रहे हैं। चाहे वह भगवान राम का धनुष हो, अर्जुन का गांडीव हो, भीम की गदा हो या फिर महाराणा प्रताप की तलवार। इन सब शस्त्रों ने हमें सिखाया है कि शस्त्र केवल आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि सुरक...