एटा, मार्च 7 -- भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। समानता और भागीदारी लोकतंत्र की मूल भावना मानी जाती है। जब हम राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर नजर डालते हैं तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाएं अभी भी राजनीतिक नेतृत्व में पर्याप्त स्थान नहीं पा सकी हैं। जब चुनावों के दौरान टिकट बटवारा होता है तो राजनीतिक दल नियम भूल जाते हैं। उस समय कोई भी दल महिलाओं के आरक्षण की बात नहीं करता। महिलाओं की राजनीति में सक्रिय भागीदारी और उनकी सुरक्षा की गारंटी आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। बोले एटा के तहत महिलाओं से बात की तो उन्होंने खुलकर राजनैतिक हिस्सेदारी और सुरक्षा की गारंटी पर खुलकर पक्ष रखा। महिलाएं समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। परिवार, समाज और देश के विकास में उनका योगदान किसी से कम नहीं ह...
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