एटा, नवम्बर 18 -- इन दिनों रबी की फसल के लिए किसान अपने खेतों में तो मेहनत कर ही रहा है, उसके साथ साथ खाद के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। कोई सुबह पांच बजे तो कोई रात में ही अपना नंबर तय करके जा रहा है। लेकिन इतनी मशक्कत के बाद भी किसान का हाथ खाली है, क्योंकि उसे फिर भी डीएपी यानी खाद मिल नहीं पा रही है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले एटा अभियान के तहत ऐसे किसानों से जब संवाद किया तो उनका दर्द बाहर आया। किसानों ने एक स्वर में कहा कि आज वो एक-एक बोरी के लिए मोहताज हो रहे हैं। खेतों में बुवाई को काम अटका पड़ा है। इस दौरान किसानों ने सवाल भी किया कि सरकार की ओर से आने वाला खाद आखिर जा कहां रहा है? किसान... महज एक शब्द नहीं है, बल्कि अपने आप में एक संस्था है। यही किसान देश की प्रगति और दिशा को तय करता है, लेकिन सरकारी तंत्र में ...