एटा, जनवरी 4 -- खिलाड़ी अपना करियर, पहचान और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम मान रहा है। बदलती सोच, सरकारी योजनाओं, स्कूलों में बढ़ती खेल गतिविधियों और सफल खिलाड़ियों की कहानियों ने युवाओं को खेल के मैदान की ओर आकर्षित किया है। इसी कड़ी में युवाओं से एटा बोले में संवाद कर उनके संकल्प, पसंदीदा खेल और भविष्य की योजनाओं को जाना गया। अधिकांश युवाओं ने मानना खेल उन्हें अनुशासन, टीमवर्क, आत्मविश्वास और नेतृत्व सिखाते हैं। पहले खेल को अभिभावक समय की बर्बादी मानते थे। इसको लेकर समाज में कहावत भी खेलोंगे-कूदोगे तो होगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नबाव। बदलते जमाने के जमाने साथ अब माता-पिता भी समझने लगे हैं कि खेल से करियर बन सकता है। खेल हमें तनाव से दूर रखते हैं और फिट रहने का सबसे अच्छा तरीका हैं। युवाओं की बदलती यह सोच दर्शाती है कि खेल अब विकल्प नहीं...
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