गया, मार्च 12 -- महाबोधि मंदिर के समीप स्थित प्राचीन पुरातात्विक स्थल ताराडीह आज भी प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण यह स्थल वर्षों से समुचित संरक्षण और विकास की प्रतीक्षा कर रहा है। विभिन्न कारणों से यह बहुमूल्य धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती जा रही है। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार ताराडीह का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। यहां हुए उत्खनन में लगभग चार हजार वर्ष पुराने अवशेष मिलने का प्रमाण प्राप्त हुआ है। बिहार सरकार के पुरातत्व निदेशालय द्वारा वर्ष 1982 से 1992 के बीच कराए गए उत्खनन में विभिन्न कालखंडों से जुड़े महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले थे। नवपाषाण काल से लेकर पूर्व-मध्यकाल और पाल काल तक की सांस्कृतिक परंपराओं के संकेत मिलते हैं। उत्खनन में मिट्टी के बर्तन, सिक्के, गहने, ...