लखनऊ, जुलाई 20 -- अवध के बिना बॉलीवुड फिल्मे अधूरी हैं। गीत, संगीत, निर्देशन, अभिनय, साउण्ड रिकार्डिंग समेत फिल्म निर्माण के सभी क्षेत्रों में अवध का न खत्म होने वाला योगदान रहा है। ये बाते रविवार को आदाब अर्ज है संस्था की ओर से काल्विन ताल्लुकेदार्स कॉलेज में बॉलीवुड और अवध विषय पर हुए संवाद में वक्ताओं ने कहीं। संवाद का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर ने किया और मेहमान वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म अभिनेता पद्मश्री डा. अनिल रस्तोगी और हैरिटेज प्रचारक जयंत कृष्णा थे। डा. अनिल रस्तोगी ने कहा कि साफ तौर पर कहूं कि फिल्मों में 35 प्रतिशत अवध होता है। अवध से निकले नौशाद, मुजफ्फर अली, साउण्ड रिकार्डिस्ट बीके चतुर्वेदी, केपी सक्सेना, हसन कमाल, अमृत लाल नागर समेत दर्जनों विभूतियों ने फिल्मों के माध्यम से अविस्मरीण योगदान दिया। एक सवाल के जवाब ने श...