कानपुर, मार्च 15 -- कानपुर, प्रमुख संवाददाता। सिर्फ बेहोश या सुन्न करने का ही काम एनेस्थेसियोलॉजिस्ट का नहीं है। मरीज के प्राणों का काफी हद तक दारोमदार भी है। ऐसे में बेहोश करने से पहले रोगी की मेडिकल हिस्ट्री अच्छे ढंग से समझ लें। खासकर उसके अंगों की कार्यशीलता, शुगर, ब्लड प्रेशर, एलर्जी तो नहीं है। ऐसी तमाम जानकारियां हैं जोकि एनेस्थेसियोलॉजिस्ट को अच्छी तरह पता होनी चाहिए। यह सलाह डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पूर्व डायरेक्टर डॉ. दीपक मालवीय ने दी। भारतीय सोसाइटी आफ एनेस्थीसियोलाजिस्ट की ओर से जीएसवीएम मेडिकल कालेज के आडिटोरियम में आयोजित सीएमई में शामिल होने आए डॉ. मालवीय ने कहा कि 2030 तक एनेस्थीसिया की वजह से मौत का आंकड़ा शून्य करना है। हालांकि यह ग्राफ तेजी से कम हो रहा है। मौजूदा समय में दो लाख में दो मौतों का कारण...