प्रयागराज, फरवरी 26 -- न्यायिक प्रक्रिया में बेवजह टालमटोल न्याय के लिए खतरनाक है। ऐसी देरी न केवल लोगों का भरोसा कम करती है बल्कि कानून को राहत देने की बजाय परेशानी का जरिया भी बना देती है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने ब्रजेश कुमार के चेक बाउंस के मामले में हुए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विलियम शेक्सपियर के शब्द सच लगते हैं कि समय न टालें, देरी के खतरनाक नतीजे होते हैं। ऐसी लंबी कानूनी कार्रवाई न्याय में देरी न्याय न मिलना है इस कहावत को साफतौर पर दिखाती है। इसके अलावा ऐसी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेजी से ट्रायल के अधिकार के मूल तत्व के भी विपरीत है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले को कानून के दायरे में त्वरित गति से निपटाया जाए, जब तक कि किसी बड़ी अदालत द्वारा रोक ...