पाकुड़, अप्रैल 9 -- ​अमड़ापाड़ा, एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश ने वनोपज पर आधारित ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है। महुआ का फल, जिसे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इस बार कुदरत के कहर की भेंट चढ़ गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के इस सीजन में महुआ का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी से भी कम रहने की आशंका है, जिससे ग्रामीणों के चेहरे पर मायूसी छाई है।​दरअसल, महुआ के बेहतर उत्पादन के लिए तेज धूप और कड़ी गर्मी की आवश्यकता होती है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और गिरते तापमान ने महुआ के फलों को समय से पहले ही झाड़ दिया है। महुआ चुन रहे ग्रामीणों ने बताया कि जो फल जमीन पर गिर रहे हैं, वे नमी के कारण काले पड़ रहे हैं और कीचड़ में मिलकर सड़ जा रहे हैं। इससे महुआ की गुणवत्ता भी पूरी तरह खराब हो चुकी ...