बेटे से बिछड़ने के गम में लिखा गाना, लव सॉन्ग समझकर गाते हैं लोग; लिरिक्स में छिपा है पिता का दर्द
नई दिल्ली, मई 21 -- आ लौट के आजा मेरे मीत... गाना सुनकर ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह प्रेमी-प्रेमिका के विरह का गाना है। पर इस गाने के बनने की कहानी बेहद इमोशनल करने वाली है। हकीकत जानने के बाद जब आप इसके बोल ध्यान से पढ़ेंगे तो अहसास होगा कि इसमें एक पिता का दर्द छिपा है। यह गाना रानी रूपमति का है। इसे पंडित भरत व्यास ने लिखा था। यही नहीं उनका एक और गाना अपने बेटे से बिछड़ने के बाद का जिनमें एक पिता की पीड़ा महसूस की जा सकती है। यह कहानी कम लोग जानते हैं।पिता की वेदना से निकला था गाना आ लौट के आजा मेरे मीत, जरा सामने तो आओ छलिये. ये दो गाने भरत व्यास ने अपने बेटे से बिछड़ने के बाद लिखे थे। 1957 की म्यूजिकल हिट जनम जनम के फेरे का एक गाना आज तक सुना जाता है। फिल्म रिलीज के वक्त यह रेडियो पर प्रसारित होता था और लोगों ने इसे बहुत पसंद किय...
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