नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी ससुर को केवल इसलिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह अपने बेटे के आचरण को नियंत्रित करने में नाकाम रहा। जस्टिस मधु जैन ने एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। महिला ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें घरेलू हिंसा के संबंध में उसके ससुर के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसके ससुर ने किसी अन्य महिला के साथ संबंधों को लेकर उससे अलग रह रहे पति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा तीन में ऐसे आचरण को शामिल किया गया है जिससे शारीरिक या मानसिक क्षति होती है या होने का खतरा होता है। अदालत ने कहा कि इसमे...