नई दिल्ली, जनवरी 22 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। रिश्तों को कलंकित करने वाले एक जघन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने वाले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह व न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा के खिलाफ पिता की अपील पर उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गई थीं। अक्सर सामाजिक और आर्थिक दबाव के चलते गवाह पीछे हट जाते हैं, लेकिन अदालत ने इस बार वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी। पीठ ने भ्रूण के डीएनए परीक्षण के नतीजों को निर्णायक माना, जिसने पुष्टि की कि आरोपी ही उस गर्भ के लिए जिम्मेदार था। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि परिवार की ...