बांका, सितम्बर 15 -- पंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधि। बेटियां अब बोझ नहीं है। बेटों से कम नहीं है। जीवन के हर क्षेत्र में बेटियों के इस बढ़ते कदम ने कई मामलों में यह साबित कर दिखाया है। अब तो बेटियां पिता के अर्थी को कंधा देकर शमशान तक साथ दे रही है।

समाज में बदलाव समाज में आज भी कई जगहों पर वंश आगे बढ़ाने और अंतिम संस्कार के लिए पुत्र की चाह रखने वालों की कमी नहीं है, लेकिन समय के साथ सोच बदल रही है। आज बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से आगे हैं और कर्तव्य निभाने के मामले में भी उन्होंने साबित कर दिया है कि वे किसी से पीछे नहीं हैं। अब लोगों के मन से यह पुरानी लालसा और भ्रम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है कि वंश केवल पुत्र से ही आगे बढ़ता है या मुखाग्नि सिर्फ बेटा ही दे सकता है।

आर्या मिश्रा का साहस पंजवारा ब्राह्मण टोला निवासी कृष्ण कुमार मिश्रा क...