जौनपुर, मार्च 6 -- ग्रामीण पृष्ठभूमि की अनेक छात्राएं पोल वॉल्ट-हैमर थ्रो, भाला, हाई जंप-दौड़, कबड्डी और वॉलीबॉल जैसे खेलों में आगे बढ़ना चाहती हैं लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की कमी, आर्थिक कठिनाई और सामाजिक सोच है। कहीं गद्दा और हैमर नहीं, कहीं स्पाइक शूज और अभ्यास के लिए समतल मैदान नहीं है। सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करने वाली इन लड़कियों को डाइट एवं प्रतियोगिताओं के व्यय और परिवार की अनुमति जैसी चुनौतियों से भी जूझना पड़ रहा है। स्थानीय मैदानों में शौचालय और चेंजिंग रूम भी नहीं हैं। इसकी वजह से उन्हें प्रैक्टिस के बाद कपड़े बदलने में असुविधा होती है। जिम्मेदार इस पर ध्यान दें। छलीशहर ब्लॉक के माधोपुर गांव के मैदान में एक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने आईं बेटियों ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत के दौरान घर से खेल मैदान तक सा...