मेरठ, अक्टूबर 5 -- हस्तिनापुर। हस्तिनापुर में ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाली बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासनिक सक्रियता तेज हो गई है। राजस्व परिषद, लखनऊ के निर्देश पर अब बूढ़ी गंगा के स्वरूप की अभिलेखीय पड़ताल शुरू कर दी गई है। सूचना आयोग और एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के आदेशों के बाद शासन स्तर पर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजस्व परिषद के निर्देश के तहत जांच का मुख्य आधार लगभग वर्ष 1952 से संबंधित 1359 फसली की खतौनी को बनाया गया है। इसके अलावा खसरा, नक्शा और गाटावार स्थिति का मिलान किया जाएगा। समिति यह जांचेगी कि पुराने रिकॉर्ड के मुकाबले बाद के वर्षों में भू-अभिलेखों में क्या परिवर्तन हुए और यदि श्रेणी बदली गई, तो वह किस आधार पर और किसके आदेश से हुई। ​सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्व परिषद के पत्र में स्पष्ट किया गय...