मेरठ, सितम्बर 17 -- सदियों से उपेक्षा, अतिक्रमण और अपने प्राकृतिक प्रवाह के संकट से जूझ रही महाभारतकालीन बूढ़ी गंगा के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में प्रदेश शासन के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने बूढ़ी गंगा के 100 वर्षीय रिटर्न पीरियड के आधार पर उसके बाढ़ मैदान के वैज्ञानिक सीमांकन एवं अधिसूचना से संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है। यह कार्रवाई प्रियंक भारती द्वारा दायर याचिका के बाद आगे बढ़ी।मेरठ समेत कई जिलों में है सीमा विशेष सचिव कुलदीप श्रीवास्तव द्वारा जारी शासनादेश के तहत बूढ़ी गंगा के बाढ़ मैदान को अक्षांश-देशांतर आधारित वैज्ञानिक सीमांकन के माध्यम से विभिन्न रीच में विभाजित किया गया है। यह क्षेत्र मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा और हापुड़ जनपदों की सीमाओं में आता है। ...