मुजफ्फर नगर, दिसम्बर 9 -- कस्बे के कृष्णा पैलेस में समाधि सम्राट चक्रवर्ती आचार्य प्रवर श्री 108 विरागसागर जी महामुनिराज का 43वां महामुनि दीक्षा दिवस विराग महोत्सव के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। यह भव्य आयोजन भावलिंगी संत आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज (ससंघ 35 पिच्छी) के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री विमर्शसागर ने अपने गुरुवर के चरणों में भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित की। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, कि दिगम्बर मुनिराज की पावन जिनमुद्रा मात्र इस धरती पर ही नहीं, अपितु तीनों लोकों में वंदनीय और पूजनीय है। दिगम्बर भेष इस धरा पर अलौकिक होता है। जहां अन्य कोई वेशभूषा नहीं ओढ़ी जाती, बल्कि जहां सारे भेष विसर्जित हो जाते हैं, वहीं दिगम्बर भेष जन्म लेता है। साधना का महत्व बताते...