बुराई का संरक्षण करने से दुर्भाग्य का जन्म होता है : विजय कौशल जी
धनबाद, जून 12 -- धनबाद, वरीय संवाददाता। धनसार के एक होटल में आयोजित श्रीराम कथा के छठे दिन गुरुवार को वृंदावन से पधारे विजय कौशल जी ने सुंदरकांड और लंकाकांड का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप विपरीत परिस्थितियों और अंधकार के समय सामने आता है। रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दिन में वह शिवभक्त और धर्माचरण करने वाला दिखाई देता था, जबकि रात में उसका दूसरा रूप प्रकट होता था। कथावाचक ने हनुमान जी की भक्ति और समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि वे सदैव भगवान श्रीराम और माता जानकी के साथ रहते हैं तथा उनकी आराधना से भगवान राम प्रसन्न होते हैं।
संतों के शब्दों का महत्व उन्होंने कहा कि संतों का सबसे बड़े अस्त्र उनके शब्द होते हैं, इसलिए संतों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोगों से दान में उत्तम वस्तुएं देने, घ...
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