प्रयागराज, अक्टूबर 14 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति पर अपनी 68 वर्षीय विधवा मां को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता है। ऐसी स्थिति में पति हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक पाने का हकदार है। कोर्ट ने पति की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी मां को उसके बेटे के साथ से वंचित करने का प्रयास पत्नी की ओर से किया गया क्रूर कृत्य है। मामले के अनुसार, पति-पत्नी का विवाह 17 फरवरी 2000 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। उनकी दो बेटियां हैं। पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है और मैनपुरी में अपनी 68 वर्षीय विधवा मां के साथ रहता है। पति का आर...