नई दिल्ली, अगस्त 27 -- उसने बहुत शौख से साइकिल चलाना सीखा था। पर उसे कभी चलाने के लिए अपनी साइकिल नहीं मिली। और जब साइकिल मिली तो उसे 1200 किलोमीटर, लगातार आठ दिनों तक इसे चलाते रहना पड़ा। अगर वो ऐसा ना करती तो शायद उसके पिता की जान भी जा सकती थी। ये किसी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। बिहार की ज्योति कुमारी ने 6 साल पहले अपने पिता के लिए एक ऐसा कदम उठाया,जिसकी चर्चा देश के बाहर अमेरिका तक हुई। साल 2020 का नाम सुनते ही आपके दिमाग में भी कोरोना और लॉकडाउन जैसे शब्द ही आते होंगे। बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली ज्योति कुमारी की कहानी लॉकडाउन से थोड़ा पहले शुरू होती है।लॉकडाउन से पहले शुरु होती है कहानी ज्योति के पिता मोहन पासवान गुरुग्राम में रहकर ईरिक्शा चलाते थे और उनका पूरा परिवार बिहार में रहता था। वहीं जनवरी 2020 में मोहन का एक ...