नई दिल्ली, जुलाई 4 -- दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के 'हाईटेक' होने के सरकारी दावों की हवा किसी बड़े अफसर या नेता ने नहीं, बल्कि 11वीं क्लास की एक छात्रा ने निकाल दी। हाईकोर्ट में एक तरफ सरकार हलफनामा देकर दावा कर रही थी कि उसके 38 सरकारी अस्पताल 'नेक्स्टजेन ई-हॉस्पिटल' ऐप के जरिये बेहतरीन काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ कोर्ट में खड़ी एक छात्रा की आपबीती ने इस दावे को खोखला साबित कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने इस ऐप का ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं। यह भी पढ़ें- चंद रुपयों की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, HC से बर्खास्त DTC कंडक्टर हुआ बहाल इस मामले की सुनवाई के दौरान तब चौंकाने वाली स्थिति पैदा हो गई, जब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने छात्रा की शिकायत पर सच्चाई जानने के लिए ...