नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- आधुनिक जीवनशैली और तनाव भरी जिंदगी में बीपी, मधुमेह, जोड़ों का दर्द, सिरदर्द जैसी आम बीमारियों को बीमा दावा खारिज करने के लिए पहले से मौजूद बीमारी (प्री-एक्जिस्टिंग डिसीज) या 'रोग छिपाना' नहीं माना जा सकता। सेंट्रल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा दावे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। आयोग की अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने एक वरिष्ठ नागरिक के मेडिकल बीमा दावे पर सुनवाई करते हुए कहा कि बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि ग्राहक को पॉलिसी लेने से पहले बीमारी की जानकारी थी या उसने जानबूझकर इसे छिपाया।क्या मामला? इससे पहले रोहिणी निवासी 65 वर्षीय यशपाल बहल ने समूह चिकित्सा बीमा योजना के तहत 21 अक्तूबर 2019 से अपना और पत्नी का साढ़े सात लाख का बीमा कराया था, इ...