दिल्ली, मई 1 -- बिहार में अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से शराब के विकल्प के तौर पर सूखे नशे (साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) का जाल और फैलता ही चला गया है.युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं और यह एक बड़ा कारोबार बन गया है.बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और है.शराब की तस्करी तो होती ही रही, देसी शराब भी बनाई जाती रही.इसलिए समय-समय पर जहरीली शराब से मौत के मामले भी सामने आते रहते हैं.वहीं, सूखे नशे का चलन भी बढ़ता जा रहा है.शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस बड़ी मात्रा में गांजा, स्मैक, ब्राउन शुगर, अफीम, चरस और हेरोइन बरामद करती रही है.इतना ही नहीं, नशे के इंजेक्शन लेने वाले कई लोग एड्स के भी शिकार हो रहे हैं.राज्य में एनडीए की नई सरकार के मुखिया सम्राट चौधरी ने भी शराबबंदी को लागू रखने की दृढ़ इच्...