नई दिल्ली, फरवरी 19 -- केंद्र में एनडीए सरकार की ऐतिहासिक वापसी के महज तीन महीने बाद ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने ही गठबंधन सहयोगियों के भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। सहयोगी दलों ने राज्य में एक दशक से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग उठाई है। इस कानून के कारण राज्य में अब तक 8 लाख से अधिक लोग कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे हैं। इस बहस की शुरुआत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कानून की समीक्षा का पुरजोर समर्थन के साथ हुई। उन्हें एनडीए के एक और घटक दल का साथ मिली। मांझी ने दावा किया कि प्रतिबंध के शिकार ज्यादातर लोग वंचित वर्गों से हैं और यह नीति राज्य को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने इस तरह की मांग की। आपको बता दें ...