नई दिल्ली, जनवरी 19 -- आपने अकसर घर के बड़े-बुर्जुगों को सुबह बिस्तर छोड़ते ही सीधा जमीन पर पैर ना रखने की सलाह देते हुए कई बार सुना होगा। क्या आप जानते हैं यह कोई महज भारतीय परंपरा या कोई धार्मिक रिवाज का हिस्सा नहीं है बल्कि यह 'बायोलॉजिकल क्लॉक' को साधने की गहरी कला है। बता दें, यह उस प्राचीन विज्ञान का हिस्सा है जो जानता था कि नींद की गहराई से जागृति के संसार में कदम रखना शरीर के लिए किसी बड़े 'सिस्टम रीबूट' से कम नहीं होता है। हमारे पूर्वजों ने इस प्रक्रिया को आध्यात्मिक अनुशासन का चोला पहनाया ताकि आम इंसान अपने शरीर की सूक्ष्म ऊर्जाओं और चेतना के संतुलन को अनजाने में नुकसान न पहुंचा सकें। आज, जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मानव शरीर के जटिल तंत्रों को परत-दर-परत खोल रहा है, तो यह स्पष्ट हो गया है कि ये रीति-रिवाज़ असल में हमारी नसों और मस...