नई दिल्ली, जनवरी 28 -- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना संगम स्नान ही माघ मेला छोड़ दिया है। बुधवार सुबह माघ मेला से निकलने से पहले वह भावुक भी नजर आए। कहा कि अभी तक जितने भी दुख मिले, उन सभी दुखों से आज बिना स्नान माघ मेला छोड़ने का दुख सबसे बड़ा हो गया है। इस दुख की भरपाई पता नहीं कब होगी। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि माघ मेला छोड़ने का फैसला अचानक नहीं लिया है। यह फैसला 11 दिन के बाद लिया गया है। इतना लंबा समय तो श्रीराम ने समुंद्र से रास्ता मांगते समय भी नहीं लिया था। तीन दिन बाद ही भगवान श्रीराम को भी कोप हो गया था। हम तो 11 दिन से यहीं पर हैं। 11 दिन में बहुत सी बैठकें हो सकती थीं। बहुत सारे विचार हो सकते थे। जब 11 दिन बाद भी निर्णय नहीं लिया गया तो हमने फैसला किया कि इसे अंतिम रूप देने के लिए निर्णायक संकल्प करेंगे। 11 दिन...