लखनऊ, मार्च 9 -- प्रदेश के राजकीय और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में एक्सरे टेक्निशियन का प्रशिक्षण बिना शिक्षकों के चल रहा है। इन अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं हैं। इससे न सिर्फ प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि इसका असर निकट भविष्य में इन एक्सरे टेक्निशियनों द्वारा की जाने वाली मरीजों की जांच पर भी पड़ेगा।चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन चल रहे स्टेट मेडिकल फैकल्टी द्वारा मान्यता प्राप्त प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेज व स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों में एक्सरे टेक्निशियन कोर्स के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों के अभाव में ट्रेनिंग कर रहे हैं। प्रदेश में अक्तूबर 2022 में पैरामेडिकल व्यवस्था में बदलाव लाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने मिशन निरामया की पहल की थी। इसमें प्रमुख रूप से संस्...