गिरडीह, जून 6 -- जमुआ। जहां एक ओर जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय संकट पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। वहीं जमुआ प्रखंड के चितरडीह पंचायत के नारोबाद गांव जंगल संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहां हर वर्ष ग्राम सभा कर जंगल का रखवाला नियुक्त किया जाता है। जो बिना वेतन/मानदेय के करीब 50 एकड़ जंगल की सुरक्षा करता है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी मजबूती के साथ निभाई जा रही है। नारोबाद गांव के लगभग 50 एकड़ भूमि पर फैले घने जंगल की सुरक्षा का दायित्व पिछले दो वर्षों से 45 वर्षीय महेंद्र हाजरा निभा रहे हैं। यह भी पढ़ें- विश्व पर्यावरण दिवस पर न्यायालय परिसर में जजों ने लगाए पौधे सखुआ, केंद, महुआ, जामुन, आम जैसे बहुमूल्य वृक्षों के साथ साथ विभिन्न वन्य जीवों से समृद्ध इस जंगल को बचाने के लिए ग्राम सभा सामुदायि...