गोड्डा, नवम्बर 17 -- पथरगामा दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित रविशंकर ठाकुर जी ने अपनी दिव्य वाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि "जो पुत्र बिना विचारे अपने माता-पिता के आदेश का पालन करता है, उसका कभी अनिष्ट नहीं हो सकता। यह शास्त्रों का अटल सिद्धांत है। महाराज जी ने कहा कि जब भी कोई अतिथि घर आए, तो पहले उसका जलपान कराना चाहिए, फिर कारण पूछना चाहिए। उन्होंने दोहा उद्धृत करते हुए कहा-"रघुकुल रीत सदा चली आई,प्राण जाई पर वचन न जाई।" अर्थात रघुकुल की परंपरा रही है कि एक बार दिया गया वचन किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं होता। बड़े पद के साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। आचार्य वशिष्ठ ने राम की जन्मकुंडली देखकर ही कहा था कि राम स्वयं सत्य हैं और सत्य ही राम है।...
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