नई दिल्ली, मई 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसी सिद्धांत के आधार पर शीर्ष अदालत ने हत्या के एक आरोपी को जमानत दे दी, जो करीब चार साल से जेल में बंद था। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने यह आदेश साहिल मनोज मचारे की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए दिया। मनोज मचारे ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। यह मामला महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के शाहापुर थाने में दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी 1 नवंबर 2022 से न्यायिक हिरासत में है, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने 2024 में आरोप तय कर दिए थे, ले...