शिमला, अगस्त 14 -- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में साफ किया है कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारी को केवल आरोपों के आधार पर बिना नियमित विभागीय जांच के नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अगर कर्मचारी पर लगाए गए आरोप उसके चरित्र या ईमानदारी पर सवाल खड़े करते हैं और उनका स्वरूप कलंककारी है, तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना जरूरी है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना नौकरी से हटाना कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता। चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने यह फैसला कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे क्लर्क की अपील पर सुनाया। बेंच ने एकल पीठ द्वारा 31 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले को रद्द करते हुए कर्मचारी की सेवा समाप्ति के आदेश को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि कर्मचारी को नौकरी से ...