पाकुड़, अप्रैल 4 -- विद्युत विभाग द्वारा बेहतर बिजली की आपूर्ति के दावे महज कागजों पर दिख रहे हैं। बिजली की 'आंखमिचौली' ने उपभोक्ताओं के जीवन में एक अजीब सी कसक भर दी है। अभी गर्मी ने पूरी तरह अपने पैर भी नहीं पसारे हैं, फिर भी बिजली की बेरुखी ने जनमानस को झुलसाने वाले जेठ की भयावहता का पूर्वाभास करा दिया है। विद्युत विभाग के मेंटेनेंस का चक्र वर्ष भर चलता रहता है। कभी 50 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में तेल के शुद्धिकरण यानी ऑयल फिल्ट्रेशन का राग अलापा जाता है, तो कभी वृक्षों की उन कोमल टहनियों की बलि दी जाती है जो तारों के मार्ग में बाधक बनती हैं। कभी 'एबी स्विच' लगाने का उपक्रम होता है, तो कभी अन्य तकनीकी सुधारों के नाम पर घंटों निर्बाध आपूर्ति को बाधित किया जाता है। विडंबना यह है कि साल भर चलने वाले इन तमाम साधना रुपी कार्यों के उपरांत भी ...
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