नई दिल्ली, दिसम्बर 18 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि बिजली तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है। किसी आदमी को केवल मकान मालिक-किरायेदार विवाद के कोर्ट में लंबित होने के कारण इससे वंचित नहीं किया जा सकता है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस मिनी पुष्कर्ना एक किरायेदार की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। इसमें बिजली वितरक कंपनी को मकान मालिक से एनओसी की मांग किए बिना उसके परिसर में बिजली की आपूर्ति बहाल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह ध्यान देने योग्य है कि बिजली एक मूलभूत आवश्यकता है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। अतः, जब तक याचिकाकर्ता के पास संबंधित संपत्ति है उसे इससे वंचित...