बिजनौर, अप्रैल 16 -- जैन मुनि श्री 108 विव्रतसागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आने वाली पीढ़ी को माता-पिता को ही संस्कार देना होगा। आज गुरुकुल परंपरा समाप्त हो गई है। शिक्षा के साथ-साथ हमें नैतिक विकास पर जोर देना चाहिए। जैन धर्म में चमत्कार को नमस्कार किया है, अंधविश्वास को नहीं। जैन धर्म में सूक्ष्म से सूक्ष्मजीव के भी प्रभु बनने तक की प्रक्रिया है। बुधवार को जैन मुनि श्री 108 विव्रतसागर जी महाराज श्री दिगंबर जैन मंदिर परिसर में वार्ता कर रहे थे। उन्होंने पंचकल्याणक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बहता पानी रमता जोगी अर्थात साधु गतिमान रहना चाहिए और पानी बहता रहना चाहिए तो वह निर्मल रहता है। जैन मुनियों के पैदल भ्रमण और दिगंबर रहने के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि जैन धर्म अहिंसा का है हमारे द्वारा भौतिक...