चंदौली, जून 27 -- चंदौली। इंसानियत, भाईचारे और हक की राह पर चलने के पैगाम के साथ अजाखाना-ए-रजा में दसवें दिन गमगीन माहौल में संपन्न हो गया। सुबह सिकंदरपुर की अंजुमन अब्बासिया और स्थानीय अजादारों की मौजूदगी में अलम, ताबूत और अजाखाना-ए-रजा के फूलों का जुलूस निकाला गया। जुलूस बाजार और डीएम कार्यालय के सामने से गुजरते हुए बिछियां करबला पहुंचा। यहां परंपरानुसार फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अवसर पर मशहूर शायर वकार सुल्तानपुरी ने मोहर्रम की अहमियत पर कलाम पेश किया। कहा कि इमाम हुसैन किसी एक समुदाय के नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के रहबर हैं। उन्होंने कहा कि करबला का पैगाम हमें बताता है कि अन्याय और ज़ुल्म के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। यह भी पढ़ें- या हुसैन की सदाओं के बीच निकला यौमे आशूरा का मातमी जुलूस अगर समाज में अमन, भाईचारा और मोह...