नई दिल्ली, मार्च 6 -- नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते ही बिहार में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। 1980 के दशक से अब तक बिहार की राजनीति पर जेपी आंदोलन से निकली तिकड़ी का असर बना रहा है। ये तीन नेता रहे हैं, लालू यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान। इनमें से एक रामविलास पासवान का निधन हो चुका है, जबकि लालू यादव अस्वस्थ रहते हैं और कमान बेटे तेजस्वी को सौंप रखी है। नीतीश कुमार बीते 20 सालों से लगातार सीएम या फिर सत्ताधारी दल के नेता के तौर पर बने रहे हैं। लेकिन अब वह दिल्ली का टिकट ले चुके हैं। इस तरह बीते करीब 5 दशकों में पहली बार बिहार की राजनीति जेपी मूवमेंट के नेताओं के बिना होगी। इन तीन नेताओं के अलावा एक बड़ा चेहरा सुशील मोदी भी थे, जो नीतीश कुमार के करीबी थे और डिप्टी सीएम रहे थे। उनका भी निधन हो गया था। नी...
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