वाराणसी, मार्च 1 -- वाराणसी, संवाद। तरना स्थित नवसाधना कला केंद्र के 27वें दीक्षांत समारोह में रविवार को संगीत और नृत्य की सुरलहरियों ने बसंती रागिनी बिखेरी। मुख्य अतिथि, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि संगीत-नृत्य साधना से जीवन का वास्तविक अर्थ स्पष्ट होता है। विशिष्ट अतिथि अल्बर्ट डिसूजा और अध्यक्ष बिशप यूजिन जोसेफ रहे। प्राचार्य फादर फ्रांसिस डि'सूजा ने परंपरा और अनुशासन को संस्थान की पहचान बताया। समारोह में शास्त्रीय गायन में राग बागेश्री की प्रस्तुतियों 'विनती सुनो मोरी अवधपुर के बसैया' और 'आज मंगल धुन गावो' ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला पर अनंग गुप्ता, तानपुरा पर प्रिया और हारमोनियम पर लक्ष्मण कुमार मुनि ने संगत दी। भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों में 'गणेश स्तुति', 'मनवी वर्णनम्', 'राजराजेश्वरी कीर्तन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.